वारिश
खोल दिये वारिश ने
माटी के द्वार,
आने लगी पवन की,
शीतल बाहार ।
वारिश की बूँदो से,
नदियाँ मुस्कराई।
रात की रोशनी में,
कीट पतंगों की,
बाहार आई ।
हरी चूनर ओढ़े,
फसले लहराई।
नन्ही बूँद जैसे इनपे,
मोती की कढ़ाई।
तृप्त हुआ इनसे,
यह मानवी संसार।
खुश होकर वन में नाचे,
मोर पंख पसार।
टार्च लिये गाँव में,
आयी जुगनू की बारात।
रिमझिम वारिश से हमे,
मिली मीठी सौगात।
श्री नीलम सोनी आलमपुर जिला भिण्ड म-प्र
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