शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

मुकेश शर्मा ओम

🌷🌷 *नमन प्रियवर* 🌷🌷

*◆रसाल छंद◆*
विधान~
[भगण नगण जगण भगण जगण जगण+लघु]
(211  111  121  211  121 121  1)
19 वर्ण, 9 ,10 वर्णों पर यति, 4 चरण
[दो-दो चरण समतुकांत।]

राम - चरण  सुखधाम, पाकर करूँ  नित वंदन।
दर्शन  लख  कर  राम, ये  हिय हुआ अब चंदन।।
भक्त  पहुँच  कर  द्वार, नित्य करता अभिनंदन।
कातर   हृदय   पुकार, आज  सुन लो रघुनंदन।।
                             *©मुकेश शर्मा "ओम"*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

वासुदेव अग्रवाल नमन जी द्वारा सवैया विधान

 वासुदेव अग्रवाल नमन तिनसुकिया ने सवैया छंद का विधान बहुत ही सरल तरीके से समझाया है । सवैया छंद विधान सवैया चार चरणों का वार्णिक छंद है जिसक...