🌷🌷 *नमन प्रियवर* 🌷🌷
*◆रसाल छंद◆*
विधान~
[भगण नगण जगण भगण जगण जगण+लघु]
(211 111 121 211 121 121 1)
19 वर्ण, 9 ,10 वर्णों पर यति, 4 चरण
[दो-दो चरण समतुकांत।]
राम - चरण सुखधाम, पाकर करूँ नित वंदन।
दर्शन लख कर राम, ये हिय हुआ अब चंदन।।
भक्त पहुँच कर द्वार, नित्य करता अभिनंदन।
कातर हृदय पुकार, आज सुन लो रघुनंदन।।
*©मुकेश शर्मा "ओम"*
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