*दोहा मुक्तक*
बोतल में जल बिक रहा, हुआ आज यह हाल ।
मिल सकता कल पंक्ति में, सुधरे न जो अमाल ।।
मिलता है पेट्रोल ज्यों, हों न नीर के पम्प ।
समय रहे चेते नहीं, होगा बहुत मलाल ।।
_राम किशोर वर्मा_
जयपुर (राजस्थान)
वासुदेव अग्रवाल नमन तिनसुकिया ने सवैया छंद का विधान बहुत ही सरल तरीके से समझाया है । सवैया छंद विधान सवैया चार चरणों का वार्णिक छंद है जिसक...
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