कविता का शीर्षक --- आप बीती
विरह की वेदना
कैसे मिटाऊं
हृदय की पीर
मन की कसक
आंखों की उदासी
कैसे छुपाऊं ।।
तुम्हारा प्रणय निवेदन
बाकी चितवन
गीतों की सरगम
अपने सूखे होंठों
से कैसे गुनगुनाऊं ।।
शीतल चांदनी रात
तारों से सजा नीला
चमकता आसमान
तारे गिन गिन
आंखों में आंसू
कैसे रात गुजारूं ।।
सपनों में आना
आके मुस्कराना ।
अपने अंदाज में
अपनापन दिखाना
दिल के एहसास को,
कैसे भुलाऊं ।।
तुम्हारी अमानत ही
संभालती रहती।
हरदम टूटकर ,बिखरती
हिम्मत दिखाती
कर्त्तव्य का पालन
करने को बिबश हूं
कैसे पास आऊ ।।
पुष्पा मिश्रा आनंद
ग्वालियर (म,प्र )
8/7/2020
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