*कविता क्या है........?*
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लेखनी के हृदय से,
थाल पूजा का लिए।
कल्पना जब मुखरित हो,
धवल कागज पर।।
जो मंदिर कवि का सजाए,
वह कविता है........
पूज्य पावन भावना से,
मूर्ति को जो प्राणमय बनाएं।
करें सुसज्जित गीत स्वर में,
कंठ की जो आरत जलाएं।
वह कविता है.........
चल पड़े युग प्रतिच्छाया,
शब्द सरिता की लहर में।
ज्योत्सना छिटकाये,
अमावस युक्त निर्जन अंध मन में,
वह कविता है........
दर्दमय संसार का हर दर्द,
अपने में समेटे।
खुद गरल का घूंट पीकर,
वृष्टि करें सुधासम।
जो नीरस प्रहर से,
वह कविता है.........
रूढ़ियों के पंगु पग को,
प्रगति का देकर आलम्बन।
जड़- जगत में चेतना को कर समाहित,
जो जागरण की रश्मियों का दे स्पंदन,
वह कविता है........
शुष्क सांसो पर टिके मानव जगत में,
सृजन की स्वर लहरियों से
कर्म के दीपक जलाकर,
जो समर्पण के भाव भर दे,
वह कविता है.........
है वही कविता, जो कहीं पर दलित, पीड़ित,
घृणित,शोषित वर्ग के जलते लहू पर,
क्रांति का उद्घोष कर दें,
संपन्न महलों के उदर से,
छीन रोटी झोपड़ी का जो पेट भर दे,
वही कविता है,वही कविता है
वही कविता है.........
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मौलिक एवं अप्रकाशित-
पुष्पा शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक
शासकीय गोरखी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
लश्कर,ग्वालियर(म.प्र.)
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