मंगलवार, 7 जुलाई 2020

विशाल शुक्ल ' प्रचंड'

विषय- *वर्षा!*
रचनाकार- *विकास शुक्ल'प्रचण्ड'* 
विधा- *वीर छंद*

हर्ष काल पावन वसुधा का,
          मोहक दृश्य ईश प्रतिमान!
शतदल खिले सरोवर दल में,
           करते भँवरे गुंजन गान!!

वर्षा रितु सावन मदमाती,
          मस्त लिए आई बौछार!
विपिन सुशोभित कनकलता से,
          वृक्षों पर पुष्पों के हार!!

कल कल ध्वनि ले निर्मल सरिता,
          घूम रही सारा संसार!
अभ्यागत बन मेघ घटायें,
          लुटा रहीं स्वर्णिम व्यवहार!!

व्यग्र धरा की अंतराल से ,
          रही पिपासा फिर भी मौन!
सोम वृष्टि ले पाहुन मेघा,
          पूछ रहे हैं प्यासा कौन!!

मृदुल कोंपलें पारिजात से,
          दीप्तमान हों उपवन बाग!
हरितक झूमें चिर यौवन में,
          त्रप्त हुए संतृष्ण तड़ाग!!

*रचनाकार - विकास शुक्ल प्रचण्ड!*
09993551910
*शिवपुरी मध्य प्रदेश!*

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