शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

दोहे

दोहे

कितनी सुंदर वाटिका, खिलते सुंदर फूल ।
शूल हृदय के सब मिटें, चुभें नहीं अब शूल ।

भिन्न भाषा धर्म यहाँ, मिल कर बनता देश ।
देश बाग महका करे, कहे यही अवधेश ।

अवधेश सक्सेना- 19072020
💐💐🙏🙏

मुक्तक

#मुक्तक #क़तआ #शायरी 

खूबसूरत है बनाती रूह को ये शायरी ।
दूर रहती शायरों से हर हमेशा कायरी ।
हो वतन की बात या फ़िर प्यार वाले गीत हों,
हल लिखे मसले मिलें मेरी पढ़ो तुम डायरी ।

अवधेश सक्सेना-20072020

मनमोहन छंद पल पल में पग

#मनमोहन छंद
(विधान- 14 मात्राओं के चार चरण
8, 6 पर यति
अंत में नगण अनिवार्य
दो दो चरण या चारों चरण तुकांत ।)
1
पल पल में पग, रहे पलट ।
समस्या नहीं, रही सुलट ।
मन में होती, कसक-मसक ।
जाती उनकी, नहीं ठसक ।

2
चमके सोना, मिले तपन ।
सुगंध बिखरे, चले पवन ।
मिलकर भड़के, पवन अगन ।
सावन आया, जले वदन ।

3
आहुति डालो, करो हवन ।
सत्य सदा ही, करो कथन ।
मीठे बोलो, सदा वचन ।
कर लो अच्छे, यहाँ जतन ।

4
फूल खिले हैं, चमन-चमन ।
जग में आगे, रहे वतन ।
हर तरफा हो, चैन अमन ।
नहीं किसी का, करो दमन ।

5
वीरों को हम, करें नमन ।
गाएँ सब मिल, जन गण मन ।
कभी नहीं हो, अधोगमन ।
पीड़ाओं का, करो शमन ।

अवधेश सक्सेना-20072020

विजात छंद प्रथम पूजा विनायक की

#विजात_छंद
1222 1222

प्रथम पूजा विनायक की ।
करें हम लोक नायक की ।
गजानन भक्ति जो करते ।
जगत में वो नहीं डरते । 
धतूरा भाँग खाते जो ।
सदा धूनी रमाते जो ।
करें अभिषेक जल से हम ।
रहें भोले शरण हर दम ।
जिन्हें नंदी घुमाते हैं ।
वही शंकर कहाते हैं ।
हमें किस बात का डर है ।
हमारे साथ शिव हर है ।
शिवा का शेर वाहन है ।
शिवा रक्षक गजानन है ।
हिमालय की दुलारी है ।
शिवा माता हमारी है ।
रहें कैलाश पर भोले ।
शिवा से प्रेम से बोले ।
हमारे जो  सहारे हैं ।
हमें सब भक्त प्यारे हैं ।
महीना है बड़ा पावन ।
जिसे कहते यहाँ सावन ।
चढ़ाएं वेलपत्री हम  ।
जपें भोले कहें बम बम ।
अवधेश सक्सेना- 22072020

मनमोहन छंद जीतेंगे हम बड़ा समर

#मनमोहन_छंद
#जीतेंगे_हम_बड़ा_समर
1
अखबारों में, छपी खबर ।
चर्चा चलती, नगर नगर ।
कोरोना की, चली लहर ।
कैसा बरपा, रहा कहर ।
2
ताला बंदी, है घर घर ।
सब कुछ ही अब, गया ठहर ।
व्यवस्था हुई, है जर-जर ।
यहाँ हवा में, घुला जहर ।
3
पानी अंदर, रहे मगर ।
इसमें जाना, नहीं उतर ।
दुनिया काँपी, है थर थर ।
भीड़ हुई सब, तितर बितर ।
4
बम बम भोले, हे हर हर ।
नाम तुम्हारा, करे निडर ।
हमने है अब, रखा सबर ।
जीतेंगे हम, बड़ा समर ।

अवधेश सक्सेना-21072020

विजात छंद करो पूजा गजानन की


प्रियामृतावधेश


वासुदेव अग्रवाल नमन जी द्वारा सवैया विधान

 वासुदेव अग्रवाल नमन तिनसुकिया ने सवैया छंद का विधान बहुत ही सरल तरीके से समझाया है । सवैया छंद विधान सवैया चार चरणों का वार्णिक छंद है जिसक...