शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

राकेश मिश्र

श्रृंगार छंद 
            
सफल कर सभी मनोरथ राम, 
विनय कर करती तुझे प्रणाम l
हाथ में तुरत उठाओ चाप , 
मेंट दो पिता जनक का ताप ll

रखो तुम उनके प्रण की लाज, 
दया कर फैलाओ यश आज ll
भबानी रखलो कुल की लाज, 
सजन श्री राम करो मम आज ll

आज तक माँगा क्या बरदान, 
किया है समय समय बलिदान l
तुम्हीं को पूजा है दिन रात, 
रखो तुम लाज हमारी मात ll

जुटा था बहुत बड़ा समुदाय, 
दसानन बांणांसुर भी आय l
झुका कर शीश गए अभिमान, 
रखो तुम पिता जनक कि शान ll

मात भी होती अधिक अधीर, 
बँधा दो राम उसे भी धीर ll
समझ अब मेरे मन की बात, 
करूँ मैं जीवन भर बरसात ll
            राकेश मिश्रा 
               शिवपुरी

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