भजन भाव....
गोपियों का निवेदन....
श्याम तुम ऐसे कठोर न बनो
दिल को चुराने वाले चोर न बनो......2 ए जी दिल को..
1 मिलना जो नहीं तो,
क्यों बुलाया है हमें
अपने प्रेम जाल में
फंसाया है हमें....2
प्राणों के आधार
कोई और न बनो...दिल को...
2 मीठी-मीठी बातों से
लुभाते हो हमें
वंशी बजा के क्यों
बुलाते हो हमें ए जी....2
मोहन हठीले
चितचोर न बनो दिल को .....
3 रोज रोज सपने में
आते हो क्यों
झलक दिखा के
जलाते हो क्यों...एजी...
छलिया छबीले
माखन चोर न बनो दिल को..
4 पिया घर द्वार सब
छोड़ दिए हैं
लाज के बंधन
तोड़ दिए हैं। एजी ...लाज
मोर पंख धारी
तुम मोर न बनो दिल को....
5 बंध गए तेरी प्रीत में हम
हार गए तेरी जीत में हम
टूट जाए ऐसी डोर न बनो
दिल को चुराने वाले......
6 दीन सुदामा के मीत सखा
अब तो अपने गले से लगा
प्रेम निशा की भोर न बनो
दिल को चुराने वाले
चोर न बनो ..श्याम तुम ऐसे..
पंडित सुदामा गुना
9993089820
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